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कैंसर केवल शारीरिक नहीं, मानसिक और भावनात्मक चुनौती भी: मरीजों और देखभालकर्ताओं के लिए व्यापक सहयोग की जरूरत

PNS,नई दिल्ली, 5 जून 2026

कैंसर को आमतौर पर एक शारीरिक बीमारी के रूप में देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता। कैंसर का निदान होने के बाद मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता माह और राष्ट्रीय देखभालकर्ता जागरूकता माह के अवसर पर विशेषज्ञों ने कैंसर देखभाल के इस महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान आकर्षित किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर से जुड़ी चिंता, भय, अनिश्चितता और अकेलेपन की भावना मरीजों के जीवन को गहराई से प्रभावित करती है। कई मामलों में यह मानसिक दबाव उपचार समाप्त होने के वर्षों बाद तक बना रहता है।

कैंसर के साथ बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियां

अध्ययनों के अनुसार, कैंसर से पीड़ित लगभग प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति गंभीर स्तर की चिंता (एंग्जायटी) का अनुभव करता है, जबकि लगभग 13 प्रतिशत मरीज अवसाद (डिप्रेशन) से प्रभावित होते हैं। उपचार के बाद भी अनेक कैंसर सर्वाइवर मानसिक तनाव, भावनात्मक असुरक्षा और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याओं से जूझते रहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी ये चुनौतियां केवल भावनात्मक स्थिति को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के पारिवारिक संबंधों, कार्यक्षमता, आर्थिक स्थिरता और जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती हैं।

देखभालकर्ताओं की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण

कैंसर से प्रभावित व्यक्ति के साथ-साथ उसके देखभालकर्ता (Caregiver) भी अनेक प्रकार के दबावों का सामना करते हैं। परिवार के सदस्य, जीवनसाथी, माता-पिता, बच्चे और मित्र अक्सर मरीज की देखभाल, अस्पताल के दौरे, दवाओं की व्यवस्था और भावनात्मक सहयोग की जिम्मेदारी निभाते हैं।

इस दौरान उन्हें अपने कार्यस्थल, पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। कई लोग अपने प्रियजन की देखभाल के लिए नौकरी के घंटे कम कर देते हैं या काम छोड़ने तक को मजबूर हो जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि देखभालकर्ताओं की मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को अक्सर पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाता, जबकि वे भी तनाव और थकान से प्रभावित होते हैं।

उपचार के साथ भावनात्मक सहयोग भी जरूरी

कैंसर सहायता संगठनों का मानना है कि चिकित्सा उपचार कैंसर देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन केवल उपचार पर्याप्त नहीं है। मरीजों और उनके परिवारों को भावनात्मक समर्थन, परामर्श, सहायक समूहों और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भी आवश्यकता होती है।

ऐसे सहयोगात्मक कार्यक्रम लोगों को अपनी भावनाएं साझा करने, तनाव से निपटने की रणनीतियां सीखने और समान अनुभवों वाले अन्य लोगों से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे मरीजों और उनके परिवारों को कठिन परिस्थितियों में आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती मिलती है।

कैंसर देखभाल की व्यापक परिभाषा की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते कैंसर मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य प्रणाली में मानसिक और भावनात्मक सहायता को भी उपचार का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। कैंसर से जुड़ी देखभाल केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के समग्र कल्याण को भी केंद्र में रखना आवश्यक है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि कैंसर की यात्रा किसी व्यक्ति को अकेले नहीं तय करनी चाहिए और न ही किसी देखभालकर्ता को अपनी भूमिका में उपेक्षित महसूस करना चाहिए। बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए शारीरिक उपचार के साथ मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक सहयोग को समान महत्व देना समय की आवश्यकता है।

 

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